Entrepreneurship and Management: Core Concepts and Principles

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1.4 प्रकार के उद्यमी (Types of Entrepreneur)

उद्यमी के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • लघु व्यवसाय उद्यमी (Small Business Entrepreneurs): ऐसे उद्यमी जो समुदाय या कस्बे के विकास के लिए कम लागत के साथ व्यवसाय शुरू करते हैं, लघु व्यवसायी उद्यमी कहलाते हैं।
  • बड़े व्यवसाय उद्यमी (Large Business Entrepreneurs): बड़े व्यवसाय में छोटे व्यवसाय के विपरीत कार्य होता है। इसमें प्रारंभिक लागत अधिक होती है एवं इनका प्रबंधन करना भी जटिल होता है।
  • स्केलेबल स्टार्ट-अप उद्यमी (Scalable Start-up Entrepreneurs): किसी समस्या को यूनिक तरीके से हल करना स्केलेबल स्टार्ट-अप उद्यमियों का एक विशेष गुण होता है। ये उद्यमी संभावित मार्केट देखते हैं और व्यवसाय प्रारंभ करते हैं। ये प्रारंभिक स्थिति में व्यवसाय प्रारंभ करके उसके प्रत्येक क्षेत्र में शामिल होते हैं और सफलता प्राप्त करते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय उद्यमी (International Entrepreneurs): अंतर्राष्ट्रीय उद्यमी वैश्विक स्तर पर बिजनेस का विस्तार करते हैं। इनके द्वारा वैश्विक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर उत्पादों को विकसित किया जाता है।
  • अभिनव उद्यमी (Innovative Entrepreneurs): इस प्रकार के उद्यमियों द्वारा नवीन प्रकार के व्यवसायों को प्रारंभ किया जा सकता है।

3.2 उद्यमी एवं प्रबंधक के बीच अंतर

उद्यमी और प्रबंधक के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

  1. स्थिति (Position): उद्यमी एक दूरदर्शी व्यक्ति होता है जो विचारों को बिजनेस में परिवर्तित करता है। वह बिजनेस का मालिक होता है, इसलिए इसके द्वारा सभी वित्तीय एवं अन्य जोखिमों (Risks) का वहन किया जाता है। दूसरी ओर, प्रबंधक एक कर्मचारी होता है जो वेतन के लिए कार्य करता है; अतः उसे किसी प्रकार का रिस्क नहीं उठाना पड़ता है।
  2. कार्य का केंद्र: उद्यमी का ध्यान बिजनेस प्रारंभ करने और बाद में व्यवसाय के विस्तार में होता है, जबकि प्रबंधक व्यवस्था के दैनिक सुचारू कामकाज पर ध्यान केंद्रित करता है।
  3. प्रेरणा (Motivation): किसी उद्यमी के लिए प्रमुख प्रेरणा उसकी उपलब्धियां होती हैं, लेकिन प्रबंधकों के लिए प्रेरणा उसके द्वारा किए गए कार्य से प्राप्त होती है।
  4. लाभ: उद्यमी का लाभ उद्यम के द्वारा प्राप्त किया जाता है, जबकि प्रबंधक एक कर्मचारी है जिसे वेतन प्राप्त होता है। यह कंपनी द्वारा दिया जाता है।
  5. जोखिम (Risk): उद्यमी स्वभाव से रिस्क लेने वाला होता है। कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए उसके द्वारा रिस्क वहन किया जाता है। दूसरी ओर, एक प्रबंधक का रिस्क से संबंध नहीं होता है। इसका कार्य कंपनी में यथास्थिति बनाए रखना है।

एक्टिविटी मैप (Activity Map)

बिजनेस के अंतर्गत एक्टिविटी मैप आपूर्ति से लेकर खरीददार तक संपूर्ण बिजनेस के फ्लो एवं संचालन को समझने में सहायता करता है। इसमें सभी गतिविधि मैप्स (Maps) का उपयोग करके बिजनेस रणनीति को बेहतर बनाया जा सकता है। एक्टिविटी मैपिंग के द्वारा दूसरी गतिविधियों को परिवर्तित किया जाता है।

एक्टिविटी मैप के गुण (Features of Activity Map)

एक्टिविटी मैप के प्रमुख गुण निम्नलिखित हैं:

  1. रोबस्ट लिंक ट्रैकिंग (Robust Link Tracking): बिजनेस एक्टिविटी मैपिंग के अंतर्गत इस प्रकार की लिंक को ट्रैक किया जाता है, जिसके द्वारा बिजनेस में अधिक लाभ होने की संभावना होती है। इसके अंतर्गत डेटा को मैप के द्वारा एनालाइज किया जाता है।
  2. स्टैंडर्ड मोड बनाम लाइव मोड: बिजनेस एक्टिविटी मैपिंग के द्वारा प्राप्त होने वाले लाइव मोड की तुलना स्टैंडर्ड मोड के साथ की जाती है। इसके द्वारा दोनों स्थितियों में होने वाले अंतर को देखा जा सकता है और इसके आधार पर आगे की योजना बनाई जा सकती है।
  3. रियल टाइम एक्टिविटी (Real Time Activity): एक्टिविटी मैपिंग के द्वारा बिजनेस में रियल टाइम एक्टिविटी दिखाई जाती है। इससे बिजनेस की वास्तविक स्थिति का विश्लेषण किया जा सकता है।

टारगेट मार्केट (Target Market)

टारगेट मार्केट संभावित ग्राहकों का एक समूह है, जिनके लिए उत्पादों या सेवाओं का विक्रय किया जाता है। इस समूह को भी आगे छोटे-छोटे खंडों में विभाजित किया जाता है। इसका विभाजन आयु, स्थान और जीवन शैली के आधार पर किया जाता है।

टारगेट मार्केट की पहचान (Identifying the Target Market)

टारगेट मार्केट की पहचान करना, मार्केटिंग के लिए अति महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके द्वारा उत्पाद को उपयुक्त ग्राहक तक पहुंचाने में मदद मिलती है। 2Q==

4.7 मूल्य निर्धारण (Pricing Policy)

मार्केटिंग कार्यों में मूल्य निर्धारण एक महत्वपूर्ण कार्य होता है। यह मार्केटिंग सम्मिश्रण का दूसरा तत्व भी है। वस्तुओं व सेवाओं की मार्केटिंग में मूल्य निर्णयों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इसलिए कंपनी के लिए मूल्यों का निर्धारण करना आवश्यक होता है, क्योंकि इसके बिना वस्तुओं व सेवाओं का क्रय-विक्रय असंभव है। मूल्य का मार्केटर के लाभों व आय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। एक गलत मूल्य निर्णय उसके वितरण व संवर्धन के संबंध में लिए गए सही निर्णयों को भी प्रभावहीन बना देता है।

मूल्य का अर्थ व परिभाषाएं

व्यक्ति की दृष्टि में मूल्य का अर्थ उस राशि से है, जो एक वस्तु के क्रय करने पर दी जाती है। मूल्य का अर्थ समझने के लिए कीमत के साथ-साथ मूल्य व उपयोगिता शब्दों के अर्थ को भी समझना आवश्यक है। उपयोगिता वस्तु की विशेषता या गुण को कहते हैं जो उसे आवश्यक संतुष्टि के योग्य बनाती है। दूसरी ओर, एक वस्तु विनिमय द्वारा जितनी वस्तुओं को आकर्षित करने या प्राप्त करने की शक्ति रखती है, उसे परिमाणात्मक रूप में प्रकट करना ही उस वस्तु की कीमत कहलाती है। इस प्रकार उपयोगिता, मूल्य का सृजन करती है, जिसे कीमत द्वारा मापा जा सकता है।

प्रबंधन (Management)

'प्रबंधन' एक व्यापक शब्द है जिसे आधुनिक औद्योगिक जगत में कई भागों में प्रयोग किया जाता है। संकीर्ण अर्थ में प्रबंधन अन्य व्यक्तियों से कार्य कराने की युक्ति है तथा विस्तृत अर्थ में प्रबंधन एक कलात्मक विज्ञान है जो निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न मानवीय प्रयासों से संबंध रखता है। इस अर्थ में प्रबंधन में प्रमुखतया नियोजन, संगठन, समन्वय, निर्देशन, अभिप्रेरण और नियंत्रण आदि कार्य सम्मिलित होते हैं। प्रो. थियो हेइमैन (Prof. Theo Haimann) के अनुसार प्रबंधन को तीन अर्थों में समझा जा सकता है: प्रथम, प्रबंधकीय अधिकारी (Managerial Officer) के अर्थ में; द्वितीय, प्रबंधन विज्ञान (Management Science) के अर्थ में; व तृतीय, प्रबंधन प्रक्रिया (Management Process) के अर्थ में। हेराल्ड कूंट्ज और ओ'डोनेल (Harold Koontz and O'Donnell) ने प्रबंधन का अर्थ प्रक्रिया (Process) से लगाया है।

1.1 प्रबंधन की परिभाषाएं (Definitions of Management)

प्रबंधन के अर्थ को आज की बदलती हुई परिस्थितियों में भली-भांति समझने के लिए कुछ प्रमुख विद्वानों द्वारा दी गई प्रबंधन की परिभाषाओं का अध्ययन करना आवश्यक है:

  1. एफ. डब्ल्यू. टेलर (F. W. Taylor): इनके अनुसार प्रबंधन यह जानने की कला है कि क्या करना है तथा उसे करने का सर्वोत्तम एवं सुलभ तरीका क्या है। टेलर की परिभाषा निम्नलिखित लक्षणों को प्रकट करती है:
    (i) प्रबंधन एक कला है।
    (ii) प्रबंधन, किए जाने वाले कार्यों का निर्धारण है।
    (iii) प्रबंधन, कार्य संपादन के श्रेष्ठतम एवं सुलभ मार्गों की खोज करता है।
  2. हेनरी फेयोल (Henri Fayol): इनके अनुसार प्रबंधन का अर्थ है पूर्वानुमान लगाना, नियोजन करना, आदेश देना, समन्वय करना तथा नियंत्रण करना।

1.3 प्रबंधन के मूल कार्य (Main Functions of Management)

प्रबंधन कई प्रकारों के माध्यम से कार्य करता है, प्रायः इसे नियोजन, आयोजन, नेतृत्व/प्रेरण और नियंत्रण के रूप में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. नियोजन करना (To Plan): भविष्य में क्या करने की जरूरत है इसे निर्धारित करना (आज, अगले हफ्ते, अगले महीने, अगले वर्ष में, अगले 5 वर्षों में, आदि) और इसके लिए योजना बनाना।
  2. आयोजन करना (To Organize): आवश्यक संसाधनों का अनुकूलतम उपयोग करना ताकि योजना का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया जा सके।
  3. स्टाफिंग (Staffing): नौकरी का विश्लेषण करके उपलब्ध नौकरियों के लिए योग्य व्यक्तियों को काम पर रखना।
  4. नेतृत्व करना (To Lead): इस बात का निर्धारण करना कि किसी स्थिति में क्या किया जाए और लोगों को इसके लिए तैयार करना।
  5. नियंत्रण करना (To Control): मॉनिटरिंग, योजनाओं की प्रतिक्रिया में प्रगति की जांच करना, जिसे फीडबैक के आधार पर संशोधन की जरूरत हो सकती है।
  6. प्रेरित करना (To Motivate): कोई कार्यवाई करने के लिए एक व्यक्ति को अभिप्रेरित करना ताकि वह इच्छित लक्ष्य की प्राप्ति में योगदान दे सके।

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