Ayurvedic Misraka Ganas: Panchamoola, Triphala and Formulations
प्रमुख आयुर्वेदिक मिश्रक गण एवं पंचमूल योग
आयुर्वेद चिकित्सा में द्रव्यों के विशिष्ट समूहों (मिश्रक गण) का विशेष महत्व है। यहाँ प्रमुख पंचमूल, कषाय और पाचन गणों के घटक, गुण-कर्म एवं चिकित्सीय प्रभावों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत है:
1. बृहत्पंचमूल (Brihat Panchamoola)
- Composition: बिल्व (Aegle marmelos), अग्निमन्थ (Premna integrifolia), श्योनाक (Oroxylum indicum), पाटला (Stereospermum suaveolens), गम्भारी (Gmelina arborea) की मूल।
- Guna Karma: गुरु, स्निग्ध, उष्ण/शीत गुणों के कारण मुख्यतः वात-कफशामक, शोथहर, वेदनास्थापन, दीपनीय एवं बल्य।
- Combined Therapeutic Effect: वातव्याधि, शोथ, शूल, ज्वर, श्वास-कास तथा वात-कफज विकारों में उपयोगी। दशमूल का प्रमुख भाग होने से वातशमन एवं शोथहर प्रभाव देता है।
2. लघुपंचमूल (Laghu Panchamoola)
- Composition: शालपर्णी (Desmodium gangeticum), पृश्निपर्णी (Uraria picta), बृहती (Solanum indicum), कण्टकारी (Solanum xanthocarpum), गोक्षुर (Tribulus terrestris) की मूल।
- Guna Karma: सामान्यतः लघु, स्निग्ध तथा वात-कफशामक। मधुर एवं तिक्त-कटु रस वाले द्रव्यों के कारण बल्य, बृंहण, दीपनीय एवं मूत्रल।
- Combined Therapeutic Effect: वातव्याधि, श्वास, कास, शोथ, मूत्रविकार, ज्वर तथा दुर्बलता में उपयोगी। यह दशमूल का लघु भाग है और वात-कफशमन तथा बृंहण में उपयोगी है।
3. वल्लिपंचमूल (Valli Panchamoola)
- Composition: विदारी (Pueraria tuberosa), सारिवा (Hemidesmus indicus), भूम्यामलकी (Phyllanthus amarus), कृष्णसारिवा (Ichnocarpus frutescens) तथा शतावरी (Asparagus racemosus)।
- Guna Karma: अधिकांश द्रव्य मधुर, तिक्त एवं गुरु-स्निग्ध प्रकृति के हैं। मुख्यतः पित्तशामक, वातशामक, बृंहण, शीतल, मूत्रल एवं रसायन।
- Combined Therapeutic Effect: दाह, पित्तविकार, मूत्रविकार, दुर्बलता, धातुक्षय तथा शरीर में अधिक उष्णता की स्थितियों में उपयोगी।
4. कण्टकपंचमूल (Kantaka Panchamoola)
- Composition: गोक्षुर (Tribulus terrestris), बृहती (Solanum indicum), कण्टकारी (Solanum xanthocarpum), शतावरी (Asparagus racemosus) तथा पुनर्नवा (Boerhavia diffusa)।
- Guna Karma: मधुर, तिक्त एवं कटु रस प्रधान। लघु, स्निग्ध एवं मूत्रल गुण। वात-कफशामक, मूत्रल, शोथहर एवं शूलहर।
- Combined Therapeutic Effect: मूत्रकृच्छ्र, मूत्राघात, अश्मरी, शोथ, श्वास-कास तथा वात-कफज विकारों में उपयोगी।
5. तृणपंचमूल (Trina Panchamoola)
- Composition: कुश (Desmostachya bipinnata), काश (Saccharum spontaneum), नल (Arundo donax), दर्भ (Imperata cylindrica) तथा काण्डेक्षु/इक्षु (Saccharum officinarum) की मूल।
- Guna Karma: मधुर रस, लघु एवं शीत गुण प्रधान। पित्तशामक, मूत्रल, दाहशामक एवं रक्तप्रसादक।
- Combined Therapeutic Effect: मूत्रदाह, मूत्रकृच्छ्र, तृष्णा, दाह, रक्तपित्त तथा पित्तप्रधान मूत्रविकारों में उपयोगी।
6. पंचवल्कल (Panchavalkala)
- Composition: न्यग्रोध (Ficus benghalensis), उदुम्बर (Ficus racemosa), अश्वत्थ (Ficus religiosa), प्लक्ष (Ficus lacor) तथा पारिष (Thespesia populnea) की त्वक्।
- Guna Karma: कषाय रस, लघु एवं रूक्ष गुण, शीत वीर्य। कफ-पित्तशामक, स्तम्भक, रक्तस्तम्भक एवं व्रणरोपण।
- Combined Therapeutic Effect: व्रण, दाह, रक्तस्राव, शोथ, त्वक् विकार तथा स्त्रीरोगों में योनि प्रक्षालन के लिए उपयोगी। बाह्य प्रयोग में व्रणशोधन एवं रोपण करता है।
7. त्रिफला (Triphala)
- Composition: हरीतकी (Terminalia chebula), विभीतकी (Terminalia bellirica), आमलकी (Phyllanthus emblica)।
- Guna Karma: त्रिफला में लवण को छोड़कर पंचरस पाए जाते हैं। लघु, रूक्ष गुण। विपाक मधुर। वीर्य मुख्यतः उष्ण/शीत मतानुसार। त्रिदोषशामक, विशेषतः वात-पित्त-कफ को संतुलित करने वाली।
- Combined Therapeutic Effect: मृदु रेचक, रसायन, चक्षुष्य, दीपनीय, पाचन, मेध्य एवं त्वक् प्रसादक। कब्ज, अजीर्ण, नेत्रविकार, प्रमेह तथा रसायन प्रयोग में उपयोगी।
8. त्रिकटु (Trikatu)
- Composition: शुण्ठी (Zingiber officinale), मरिच (Piper nigrum), पिप्पली (Piper longum)।
- Guna Karma: कटु रस, लघु, तीक्ष्ण एवं रूक्ष गुण, कटु विपाक, उष्ण वीर्य। कफ-वातशामक तथा पित्तवर्धक।
- Combined Therapeutic Effect: दीपनीय, पाचन, आमपाचन, कफहर, श्वास-कासहर एवं मेदहर। अग्निमांद्य, अजीर्ण, कफविकार, स्थौल्य एवं श्वसन विकारों में उपयोगी।
9. त्रिमद (Trimada)
- Composition: चित्रक (Plumbago zeylanica), नागर (Zingiber officinale) तथा मरिच (Piper nigrum)।
- Guna Karma: कटु रस, लघु-तीक्ष्ण गुण, कटु विपाक एवं उष्ण वीर्य। वात-कफशामक, दीपनीय एवं पाचन।
- Combined Therapeutic Effect: अग्निमांद्य, अजीर्ण, आम, उदरशूल, कफविकार तथा मंदाग्नि में उपयोगी।
10. चतुरुषण (Chaturushana)
- Composition: शुण्ठी (Zingiber officinale), मरिच (Piper nigrum), पिप्पली (Piper longum) तथा पिप्पलीमूल (Piper longum)।
- Guna Karma: कटु रस, लघु एवं तीक्ष्ण गुण, कटु विपाक, उष्ण वीर्य। कफ-वातशामक, अग्निदीपक एवं आमपाचक।
- Combined Therapeutic Effect: अग्निमांद्य, अजीर्ण, आम, कफसंचय, श्वास, कास तथा उदरविकारों में उपयोगी।
11. पंचकोल (Panchakola)
- Composition: पिप्पली (Piper longum), पिप्पलीमूल (Piper longum), चव्य (Piper retrofractum), चित्रक (Plumbago zeylanica), शुण्ठी (Zingiber officinale)।
- Guna Karma: कटु रस, लघु-तीक्ष्ण गुण, कटु विपाक एवं उष्ण वीर्य। वात-कफशामक, दीपनीय, पाचन एवं आमपाचक।
- Combined Therapeutic Effect: अग्निमांद्य, अजीर्ण, आम, आध्मान, उदरशूल, कफविकार तथा प्रसूता में जठराग्नि सुधारने में उपयोगी।
12. षडुषण (Shadushana)
- Composition: शुण्ठी (Zingiber officinale), मरिच (Piper nigrum), पिप्पली (Piper longum), पिप्पलीमूल (Piper longum), चव्य (Piper retrofractum) तथा चित्रक (Plumbago zeylanica)।
- Guna Karma: कटु रस, लघु, तीक्ष्ण एवं रूक्ष गुण, कटु विपाक, उष्ण वीर्य। वात-कफशामक, दीपनीय एवं पाचन।
- Combined Therapeutic Effect: मंदाग्नि, अजीर्ण, आम, उदरशूल, आध्मान, कफज विकार तथा श्वास-कास में उपयोगी।
13. चतुरबीज (Chaturbeeja)
- Composition: कृष्णजीरक (Nigella sativa), जीरक (Cuminum cyminum), मागधी/पिप्पली (Piper longum) तथा यवानी (Trachyspermum ammi)।
- Guna Karma: मुख्यतः कटु रस, लघु-तीक्ष्ण गुण, कटु विपाक एवं उष्ण वीर्य। वात-कफशामक, दीपनीय, पाचन एवं वातानुलोमक।
- Combined Therapeutic Effect: अजीर्ण, अरुचि, आध्मान, वातशूल, अग्निमांद्य एवं कफविकारों में उपयोगी।
14. त्रिजातक (Trijataka)
- Composition: त्वक्/दालचीनी (Cinnamomum verum), एला (Elettaria cardamomum) तथा तमालपत्र (Cinnamomum tamala)।
- Guna Karma: कटु, तिक्त एवं मधुर रस, लघु एवं तीक्ष्ण गुण, कटु विपाक, उष्ण वीर्य। कफ-वातशामक, दीपनीय एवं पाचन।
- Combined Therapeutic Effect: अग्निमांद्य, अरुचि, अजीर्ण, मुखदुर्गन्ध, कफविकार एवं श्वास-कास में उपयोगी।
15. चतुरजातक (Chaturjataka)
- Composition: त्वक् (Cinnamomum verum), एला (Elettaria cardamomum), तमालपत्र (Cinnamomum tamala) तथा नागकेशर (Mesua ferrea)।
- Guna Karma: कटु, तिक्त, कषाय एवं मधुर रस। लघु, तीक्ष्ण एवं रूक्ष गुण। कटु विपाक, उष्ण वीर्य। कफ-वातशामक, दीपनीय, पाचन एवं ग्राही।
- Combined Therapeutic Effect: अरुचि, अग्निमांद्य, अजीर्ण, कफविकार, अतिसार एवं मुखदुर्गन्ध में उपयोगी।
16. पंचतिक्त (Pancha Tikta)
- Composition: निम्ब (Azadirachta indica), पटोल (Trichosanthes dioica), गुडूची (Tinospora cordifolia), वासा (Adhatoda vasica) तथा कण्टकारी (Solanum xanthocarpum)।
- Guna Karma: तिक्त रस प्रधान, लघु एवं रूक्ष गुण, कटु विपाक, सामान्यतः शीत/उष्ण वीर्य। पित्त-कफशामक, रक्तशोधक, ज्वरघ्न एवं कृमिघ्न।
- Combined Therapeutic Effect: ज्वर, कुष्ठ, त्वक् विकार, रक्तदुष्टि, कण्डू, आमपित्त तथा कफ-पित्तजन्य रोगों में उपयोगी।
17. चतुर्भद्र (Chaturbhadra)
- Composition: मुस्ता (Cyperus rotundus), अतिविषा (Aconitum heterophyllum), शुण्ठी (Zingiber officinale) तथा कुटज (Holarrhena antidysenterica)।
- Guna Karma: तिक्त-कटु-कषाय रस, लघु एवं रूक्ष गुण, कटु विपाक। वीर्य मुख्यतः उष्ण। कफ-पित्तशामक, दीपनीय, पाचन एवं ग्राही।
- Combined Therapeutic Effect: अतिसार, आमातिसार, अजीर्ण, ज्वर, छर्दि एवं बालरोगों में विशेष उपयोगी।
18. त्रिकर्षिक (Trikarshika)
- Composition: शुण्ठी (Zingiber officinale), मरिच (Piper nigrum) तथा पिप्पली (Piper longum)। तीनों द्रव्य सामान्यतः 1-1 कर्ष मात्रा में लिए जाते हैं।
- Guna Karma: कटु रस, लघु, तीक्ष्ण एवं रूक्ष गुण, कटु विपाक, उष्ण वीर्य। कफ-वातशामक तथा अग्निदीपक।
- Combined Therapeutic Effect: दीपनीय, पाचन, आमपाचन, कफहर, वातानुलोमक एवं श्वास-कासहर। अग्निमांद्य, अजीर्ण, आध्मान, कफविकार एवं श्वसन विकारों में उपयोगी।
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