Ayurvedic Bhaishajya Kalpana and Rasashastra Principles
Secondary Dosage Forms: Upakalpana
Upakalpana refers to secondary dosage forms in Ayurveda. These include:
- Kalka: Churna Kalpana, Pramathya Kalpana, Paniya Kalpana, Ushnodaka, Ksheera Paka Kalpana, Laksha Rasa, and Mamsa Rasa.
- Hima Kalpana: Mantha Kalpana, Udaka Kalpana, and Panaka Kalpana.
- Phanta Kalpana: Arka.
Pancha Vidha Kashaya Kalpana
पञ्चविध कषाय कल्पनमिति । तद्यथा-स्वरस, कल्कः, श्रुतः फाण्टश्चेति । तेषां यथा पूर्वं बलाधिक्यं (च.सू. 4/4)
यन्त्र निष्पीडिता द्रव्यात् रसः स्वरस उच्यते । (च.सू. 4)/7
यः पिण्डो रसपिष्टानां कल्कः स परिकीर्तितः । (च.सू. 4)
वह्नौ तु क्वथितं द्रव्यं श्रुतमाहुश्चिकित्सकाः (च.सू. 4/25)
द्रव्यादापोथितात्तोये तत्पुनर्निशि संस्थितात् । कषायो योऽभिनिर्याति स शीतः समुदाहृतः ॥ (च.सू. 4/6)
क्षिप्त्तोष्णतोये मृदितं तत् फाण्टं परिकीर्तितम् । (च.सू. 4/6)
Avaleha Kalpana: Definition and Preparation
अवलेह कल्पना - लिह आस्वादने
क्वाथादीनां पुनः पाकाद्धनत्वं सा रसक्रिया । सोऽवलेहुश्च लेहः स्यात्तन्मात्रा स्यात्पलोन्मिता ॥ (शा.म. 8/1)
The preparation of Avaleha involves essential ingredients, a general method of preparation, and specific rules regarding temperature, Siddhi Lakshana (completion signs), shelf life, and examples.
Quality Control Tests for Avaleha
- तन्तुमत्त्व (Thread Test): अवलेह को अंगूठे और तर्जनी के बीच दबाने पर पतला तन्तु (धागा) बनता है।
- अप्सु मज्जन (Water Test): अवलेह की एक बूंद पानी में डालने पर वह पानी में फैलती नहीं, बल्कि नीचे बैठ जाती है।
- खत्व / स्थिरत्व: अवलेह उचित गाढ़ापन प्राप्त कर लेता है तथा अधिक पतला या अधिक कठोर नहीं होता।
- मुद्रिता (Finger Impression Test): ठंडा होने पर उंगली दबाने से उसका निशान बन जाता है और तुरंत मिटता नहीं है।
- गन्ध (Characteristic Odour): औषध की प्राकृतिक एवं मनोहर गन्ध आती है, जली हुई गन्ध नहीं होती।
- वर्ण (Characteristic Colour): अवलेह का रंग समान एवं औषध के अनुरूप होता है।
- रस (Characteristic Taste): औषध का विशिष्ट स्वाद बना रहता है; न अधिक जला हुआ और न ही कच्चा स्वाद होता है।
- लेह्यत्व (Lickable Consistency): अवलेह चाटने योग्य, मुलायम तथा एकसमान होना चाहिए; न अधिक चिपचिपा और न अत्यधिक कठोर।
Vasa Avaleha Ingredients
- Vasa: 8 parts
- Sarkara: 4 parts
- Pippali: 1 part
- Ghrita: 1 part
- Shahad (Honey): 4 parts
Ghrita Murchana
Ghrita Murchana: HBAM, HAL, Nimbu (4 parts each) and Ghee (64 Tola).
Aushadha Sevana Kala: Timing of Medicine
| क्रम | औषध सेवन काल | सेवन का समय | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|---|
| 1 | अनन्न | खाली पेट | कफ रोग, रसायन |
| 2 | अन्नादौ (प्राग्भक्त) | भोजन से पहले | अपानवायु, अर्श |
| 3 | मध्ये | भोजन के मध्य | समान वायु, अग्निमांद्य |
| 4 | पश्चात् (अधोभक्त) | भोजन के बाद | व्यान एवं उदान वायु |
| 5 | अन्तरभक्त | दो भोजनों के बीच | हृदय एवं जीर्ण रोग |
| 6 | सभक्त | भोजन के साथ | बालक, वृद्ध, दुर्बल |
| 7 | सामुद्ग | भोजन से पहले व बाद | कास, श्वास, हिचकी |
| 8 | मुहुः-मुहुः | बार-बार | तृष्णा, छर्दि, विष |
| 9 | सग्रास | प्रत्येक ग्रास के साथ | मुख एवं कण्ठ रोग |
| 10 | ग्रासान्तर | दो ग्रासों के बीच | स्वरभेद, श्वास |
Rasashastra: Classification of Rasaushadhi
घटक द्रव्यों के आधार पर गन्धक के योग से तथा गन्धक रहित के भेद से मुख्यत: 2 प्रकार के होते हैं:
(क) सगन्ध: इसमें पारद तथा गन्धक के साथ ही कुछ अन्य धातुवें भी होते हैं-
- पारद गन्धक रससिन्दूर
- पारद गन्धक + स्वर्ण मकरध्वज एवं सिद्ध मकरध्वज; पारद + गन्धक ताम्र = ताम्र सिन्दूर; पारद गन्धक वंग नौसादर स्वर्ण वंग
- पारद + गन्धक उपरस/साधारण रस: पारद + गन्धक हरताल = ताल सिन्दूर; पारद + गन्धक मनःशिला = शिला सिन्दूर; पारद + गन्धक + मल्ल (आर्सेनिक) = मल्ल सिन्दूर; पारद + गन्धक हरताल मनःशिला मल्ल समीर पत्रग
(ख) निर्गन्ध: पारद + कासीस + सैन्धव लवण = रस पुष्प; पारद गन्धकाम्ल + सैन्धव लवण = रस कर्पूर
Classification Based on Preparation Site
- कण्ठस्थ (Galsya): रस सिन्दूर, मल्ल सिन्दूर, ताल सिन्दूर, रस पुष्प, रसकर्पूर, आदि।
- तलस्थ: स्वर्ण वंग, समीर पन्नग।
- उभयस्थ: मकरध्वज, सिद्ध मकर ध्वज।
Kupipakva Rasayana Preparation Steps
- कपड़ मिट्टी युक्त कांच कूपी निर्माण
- कूपी में कज्जली पूरण
- कूपी स्थापन
- अग्नि व्यापार
- सिद्धि लक्षण अवलोकन
- कूपी मुख मुद्रण
- स्वांग शीतलीकरण
- कूपी भेदन
- कूपी पक्व रस एकत्रीकरण
Tests: Red bottom, Sheeta Shalaka, Coin test, and Honeycomb appearance.
Parpati Kalpana Classification
- Sagandha: a) Rasa Parpati (Parada + Gandhaka) b) Tamra Parpati c) Swarna Parpati d) Lauha Parpati e) Gagana Parpati f) Bola Parpati g) Panchamrita Parpati.
- Nirgandha: a) Shweta Parpati (Suryakshara + Sphatika + Navasadhara) b) Malla Parpati.
Paka Types: 1. Mridu Paka (Mayura Chandrikakara) 2. Madhya Paka (Tailabha) 3. Khara Paka (Rakta Varna).
Specific Formulations
Swas Kuthar Ras: 10g each of Shuddha Parada, Shuddha Gandhaka, Shuddha Vatsanabha, Tankana Bhasma, Manashila, Shunti, Pippali, and Maricha (90g total).
Vata Vidvansh Ras: Shuddha Parada, Shuddha Gandhaka, Naga Bhasma, Vanga Bhasma, Lauha Bhasma, Abhrak Bhasma, Tamra Bhasma, Pippali, Shuddha Tankana, Shunti, Maricha, and Vatsanabha in equal parts.
Bhavana Dravya: Trikatu, Triphala, Chitraka, Bhringaraja, Kushta, Nirgundi, Arka Dugdha, Tamalaki, Chandrashur Jala, and Nimbu Swarasa (3 Bhavana each).
Parada Dosha: Mercury Defects and Purification
नागी वङ्गो मलो बहिश्चापल्यं च विषं गिरिः। असह्याग्निर्महादोषा निसर्गात्यारदे स्थिताः ॥ (आ.प्र. 1/10)
पारद में विद्यमान वे अशुद्धियाँ जो उसके औषधीय गुणों को कम कर देती हैं तथा शरीर के लिए हानिकारक होती हैं, पारद दोष कहलाती हैं।
The Eight Defects of Mercury (Ashta Dosha)
- नाग दोष: सीसा (Lead) की अशुद्धि। प्रभाव: कुष्ठ और त्वचा रोग।
- वंग दोष: टिन (Tin) की मिलावट। प्रभाव: कफ विकार।
- मल दोष: धूल, मिट्टी, रेत। प्रभाव: गुणवत्ता में कमी।
- वह्नि दोष: अग्नि के अनुचित संपर्क से उत्पन्न।
- चापल्य दोष: अत्यधिक चंचलता। प्रभाव: मर्दन में कठिनाई।
- विष दोष: विषैले तत्त्वों की उपस्थिति।
- गिरि दोष: खनिज एवं पाषाण संबंधी अशुद्धियाँ।
- असह्याग्नि दोष: अग्नि सहन न कर पाना; पारद शीघ्र उड़ जाता है।
Parada Samanya Shodhana
Method: पारद को लशुन एवं सैन्धव के साथ मर्दन किया जाता है। तत्पश्चात् काञ्जी या त्रिफला क्वाथ से धोया जाता है। अंत में शुद्ध पारद प्राप्त होता है।
Parada Ashtasamskara: The Eight Stages
"स्वेदनं मर्दनं मूर्च्छा उत्थापनं पातनम्। रोधनं नियमनं चैव दीपनं चाष्टसंस्कृतिः॥" (रस रत्न समुच्चय)
- स्वेदन: दोषों को दूर करने के लिए गर्म करना।
- मर्दन: औषधीय द्रव्यों के साथ घोटना।
- मूर्च्छन: चंचलता कम करना।
- उत्थापन: मूल स्वरूप में वापस लाना।
- पातन: यंत्रों की सहायता से उड़ाकर शुद्ध करना।
- रोधन: स्थिरता प्रदान करना।
- नियमन: गुणों को नियंत्रित करना।
- दीपन: औषधीय क्षमता बढ़ाना।
Mineral and Metal Processing Standards
| द्रव्य | पर्याय / खनिज पहचान | स्रोत / प्रकार | ग्राह्य लक्षण | अग्राह्य / दोष | शोधन / मारण |
|---|---|---|---|---|---|
| पारद (Mercury) | रसेन्द्र, Hg | सिनाबार, चीन | चमकीला, भारी | मलिनता, हल्का | त्रिफला, लहसुन मर्दन |
| अभ्रक (Mica) | ब्रह्मपत्र, Silicate | झारखण्ड, कृष्ण | स्निग्ध, पटलदार | भंगुर, खुरदरा | गोमूत्र स्वेदन, 1000 पुट |
| माक्षिक (Chalcopyrite) | CuFeS₂ | राजस्थान | सुवर्णवर्ण, स्निग्ध | काले धब्बे | नींबू रस, अग्नि पुट |
| शिलाजतु (Asphaltum) | Mineral Pitch | हिमालय | चिपचिपा, तन्तुमय | दुर्गन्धयुक्त | त्रिफला शोधन |
| गन्धक (Sulfur) | कनीयक, S | ज्वालामुखी क्षेत्र | कोमल, पीतवर्ण | मलिन, शुष्क | घृत मर्दन, गन्धक रसायन |
| गैरिक (Red Ochre) | Fe₂O₃ | मध्य प्रदेश | रक्तवर्ण, स्निग्ध | खुरदरा | त्रिफला, नींबू शोधन |
| काङ्क्षी (Alum) | स्फटिक, Alum | गुजरात | स्वच्छ, स्फटिकाकार | मलिन, भंगुर | नींबू रस स्वेदन |
| हरताल (Orpiment) | As₂S₃ | नेपाल | पीतवर्ण, स्निग्ध | काले धब्बे | नींबू, अदरक रस मर्दन |
| मनःशिला (Realgar) | As₂S₂ | बंगाल | रक्ताभ, चमकीली | मलिन, शुष्क | त्रिफला क्वाथ शोधन |
| कम्पिल्लक | Mallotus | भारत | चमकीला लाल | धूलयुक्त | गौदुग्ध शोधन |
| नवसादर | NH₄Cl | खनिज लवण | श्वेत, शीतल | पीलापन | अदरक रस शोधन |
| हिंगुलक (Cinnabar) | HgS | चीन | रक्तवर्ण, चमकीला | मलिन | नींबू रस, गोमूत्र |
| स्वर्ण (Gold) | कनक, Au | दक्षिण भारत | भारी, पीतवर्ण | हल्का, मलिन | तिल तैल, त्रिफला |
| रजत (Silver) | रुप्य, Ag | राजस्थान | उज्ज्वल, शीतल | धूमिल | नींबू रस शोधन |
| ताम्र (Copper) | लोहित, Cu | नेपाल | रक्तवर्ण, स्निग्ध | काला, मलिन | तक्र, नींबू शोधन |
| लोह (Iron) | अयस्, Fe | छतीसगढ़ | भारी, चमकीला | मलिन, हल्का | त्रिफला क्वाथ शोधन |
| मण्डूर (Rust) | Fe₂O₃ | लोहे का जंग | रक्तवर्ण | मलिन, पाषाण | तक्र, नींबू शोधन |
| वंग (Tin) | Sn | बिहार | स्निग्ध, उज्ज्वल | मलिन | नींबू रस, गोमूत्र |
| नाग (Lead) | Pb | बिहार | भारी, श्यामवर्ण | हल्का, मलिन | त्रिफला क्वाथ शोधन |
| यशद (Zinc) | Zn | झारखण्ड | उज्ज्वल सफेद | धूमिल | तक्र, गोमूत्र शोधन |
| मुक्त (Pearl) | CaCO₃ | समुद्री सीप | स्निग्ध, गोल | काला, भंगुर | गुलाब जल शोधन |
| प्रवाल (Coral) | CaCO₃ | समुद्र तट | रक्तवर्ण, स्निग्ध | मलिन, भुरभुरा | नींबू रस शोधन |
| वज्र (Diamond) | हीरक, C | मध्य प्रदेश | उज्ज्वल, कठोर | मलिन, फटा | तैल, नींबू शोधन |
| कपर्दक (Cowries) | CaCO₃ | समुद्री शंख | पीत चमकीला | भंगुर, मलिन | नींबू रस शोधन |
| शुक्ति (Oyster) | CaCO₃ | समुद्री सीप | श्वेत स्निग्ध | मलिन, टूटा | गोमूत्र शोधन |
| शंख (Conch) | CaCO₃ | समुद्र | श्वेत, भारी | भंगुर, मलिन | नींबू रस शोधन |
| गोदन्ती (Gypsum) | CaSO₄·2H₂O | हिमालय | श्वेत चमकीली | मलिन, पीलापन | नींबू रस शोधन |
| समुद्रफेन | Aragonite | समुद्र | रन्ध्रयुक्त हल्का | मलिन, गन्धयुक्त | नींबू रस शोधन |
| कुक्कुटाण्ड त्वक | Egg Shell | अण्डकटक | श्वेत स्निग्ध | दुर्गन्धयुक्त | तक्र शोधन |
| टंकण (Borax) | Na₂B₄O₇ | गुजरात | श्वेत स्फटिकाकार | मलिन, पीला | नींबू रस शोधन |
| सस्यक | Peacock Ore | नेपाल | नीला-हरा उज्ज्वल | धूमिल | तक्र शोधन |
| कसीस | FeSO₄·7H₂O | राजस्थान | हरित स्फटिक | मलिन, धूमिल | नींबू रस, गोमूत्र |
| गौरी पाषाण | As₂O₃ | चीन | श्वेत उज्ज्वल | मलिन | नींबू, अदरक रस |
| तृणकान्त | Silicate | बिहार | पारदर्शक चमकीला | धूमिल | नींबू रस शोधन |
| अकीक (Agate) | SiO₂ | गुजरात | स्निग्ध पारदर्शक | धूमिल | नींबू रस, गोमूत्र |
| सुधा (Limestone) | CaCO₃ | राजस्थान | श्वेत स्निग्ध | मलिन | नींबू रस शोधन |
| खटिका (Chalk) | CaCO₃ | गुजरात | श्वेत स्निग्ध | मलिन | नींबू रस, गोमूत्र |
| अजश्म | MgCO₃ | नेपाल | श्वेत स्निग्ध | मलिन | नींबू रस, तक्र |
| ज़हरमोहरा | Serpentine | कश्मीर | हरा स्निग्ध | धूमिल | नींबू रस शोधन |
| दुग्धपाषाण (Talc) | Mg₃Si₄O₁₀(OH)₂ | हिमालय | दूध जैसा श्वेत | मलिन | नींबू रस, गोमूत्र |
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