13 प्रमुख आयुर्वेदिक औषधियाँ: गुण, कर्म और प्रसिद्ध योग

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आयुर्वेद के 13 प्रमुख द्रव्य: गुण, कर्म और प्रसिद्ध योग

1. जटामांसी (Jatamansi)

वानस्पतिक नाम: Nardostachys jatamansi (Valerianaceae कुल)

इसे "तपस्विनी" और "मूलीसरा" भी कहा जाता है, तथा अंग्रेज़ी में इसे Spikenard कहते हैं।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-कषाय रस, लघु-तिक्त गुण, शीतवीर्य, मधुर विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): मनोविकार, अनिद्रा और स्मृति-वृद्धि।
  • प्रयोज्यांग: मूल (Root)।
  • प्रसिद्ध योग: सारस्वत चूर्ण।

2. आरग्वध (Aragvadha)

वानस्पतिक नाम: Cassia fistula (Fabaceae कुल)

इसे "करय" और "राजवृक्ष" (Indian Laburnum) के नाम से भी जाना जाता है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: मधुर-तिक्त रस, गुरु-शीत गुण, शीतवीर्य, मधुर विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): विरेचन (Purgation) और कास-श्वास नाशन।
  • प्रयोज्यांग: फल-गूदा (Fruit pulp)।
  • प्रसिद्ध योग: आरग्वध क्वाथ।

3. ज्योतिषमती (Jyotishmati)

वानस्पतिक नाम: Celastrus paniculatus (Celastraceae कुल)

यह "मालकांगनी" (Intellect Tree) नाम से प्रसिद्ध है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-कटु रस, लघु-उष्ण गुण, उष्णवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): बुद्धिवर्धक, मेध्य (Intellect promoting) और वातनाशक।
  • प्रयोज्यांग: बीज और तेल।
  • प्रसिद्ध योग: मालकांगनी तेल (स्मरण शक्ति हेतु)।

4. अर्जुन (Arjuna)

वानस्पतिक नाम: Terminalia arjuna (Combretaceae कुल)

इसे "ककुभ" (Arjuna Myrobalan) कहा गया है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: कषाय रस प्रधान, लघु-रूक्ष गुण, शीतवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): हृदय रोग, रक्तपित्त और क्षय रोग।
  • प्रयोज्यांग: छाल (Bark)।
  • प्रसिद्ध योग: अर्जुनारिष्ट।

5. कचनार (Kachnar)

वानस्पतिक नाम: Bauhinia variegata (Fabaceae कुल)

इसका पर्याय "कोविदार" (Kachnar Tree) है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: कषाय-तिक्त रस, लघु-उष्ण गुण, उष्णवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): गलगंड (Goiter) और ग्रंथि-रोग (Glandular diseases)।
  • प्रयोज्यांग: छाल।
  • प्रसिद्ध योग: कांचनार गुग्गुलु।

6. अतिविषा (Ativisha)

वानस्पतिक नाम: Aconitum heterophyllum (Ranunculaceae कुल)

यह "शिशुपुष्पी" और "शीतला" (Indian Atis) नाम से जानी जाती है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-कषाय रस, लघु-शीत गुण, शीतवीर्य, मधुर विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): बालरोग, अतिसार (Diarrhea) और ज्वर।
  • प्रयोज्यांग: मूल।
  • प्रसिद्ध योग: अतिविषादि चूर्ण।

7. कटुकी (Katuki)

वानस्पतिक नाम: Picrorhiza kurroa (Scrophulariaceae कुल)

इसे "कट्वी" और "तिक्ता" (Picrorhiza) नाम से भी जाना जाता है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-कषाय रस, लघु-तिक्त गुण, शीतवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): यकृत रोग, पीलिया (Jaundice) और त्वक्विकार (Skin disorders)।
  • प्रयोज्यांग: मूल।
  • प्रसिद्ध योग: आयुष-64 जैसे यकृत योगों में प्रयुक्त।

8. खदिर (Khadira)

वानस्पतिक नाम: Acacia catechu (Fabaceae कुल)

यह "कदर" और "समङ्गा" (Catechu Tree) नाम से प्रसिद्ध है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: कषाय रस प्रधान, लघु-शीत गुण, शीतवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): कुष्ठ (Skin diseases), रक्तपित्त और कंठरोग नाशक।
  • प्रयोज्यांग: हृदय-काष्ठ (Heartwood)।
  • प्रसिद्ध योग: खदिरादि वटी।

9. भल्लातक (Bhallataka)

वानस्पतिक नाम: Semecarpus anacardium (Anacardiaceae कुल)

इसे "भल्लातकी" और "अर्चिष्मान" (Marking Nut) भी कहते हैं।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: कटु-तिक्त-कषाय रस, उष्णवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): कृमि (Worms), उदररोग और त्वचारोग।
  • प्रयोज्यांग: बीज।
  • प्रसिद्ध योग: भल्लातक रस।

10. कुमारी (Kumari)

वानस्पतिक नाम: Aloe vera (Liliaceae कुल)

यह "घृतकुमारी" (Aloe) कहलाती है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-कषाय रस, गुरु-शीत गुण, शीतवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): स्त्रीरोग, यकृत विकार और व्रण (Wounds)।
  • प्रयोज्यांग: पर्णसार (Leaf pulp)।
  • प्रसिद्ध योग: कुमारासव।

11. भृङ्गराज (Bhringraj)

वानस्पतिक नाम: Eclipta alba (Asteraceae कुल)

इसे "केशराज" (False Daisy) भी कहा जाता है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-कषाय रस, लघु-उष्ण गुण, उष्णवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): केशवृद्धि, यकृत रोग और त्वचारोग।
  • प्रयोज्यांग: पंचांग (Whole plant)।
  • प्रसिद्ध योग: भृङ्गराज तेल।

12. बिल्व (Bilva)

वानस्पतिक नाम: Aegle marmelos (Rutaceae कुल)

यह "श्रीफल" (Bael Tree) नाम से जाना जाता है।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: कषाय-मधुर रस, गुरु-उष्ण गुण, उष्णवीर्य, कटु विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): अतीसार (Dysentery), ग्रहणी (Malabsorption) और अग्निमांद्य (Digestive weakness)।
  • प्रयोज्यांग: फल।
  • प्रसिद्ध योग: बिल्वादि चूर्ण।

13. ब्राह्मी (Brahmi)

वानस्पतिक नाम: Bacopa monnieri (Scrophulariaceae कुल)

इसे "सारस्वती" (Brahmi) भी कहते हैं।

  • रस, गुण, वीर्य, विपाक: तिक्त-मधुर रस, लघु-शीत गुण, शीतवीर्य, मधुर विपाक।
  • मुख्य प्रयोग (कर्म): मेध्य, स्मृतिवर्धक और मनोबलदायक।
  • प्रयोज्यांग: पंचांग।
  • प्रसिद्ध योग: ब्राह्मी घृत।

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